अध्याय 12 - निदा फ़ाजली
Reprint 2025-26
हिंदी साहित्य में निदा फ़ाजली जी उर्दू की साठोत्तरी पीढ़ी के महत्वपूर्ण कवियों में से एक माने जाते हैं। आम बोलचाल की भाषा में और सरलता से किसी के भी दिल और दिमाग में घर कर सकने वाली कविता लिखने की कला में वे माहिर थे।
इस इंटरैक्टिव पाठ में हम निदा फ़ाजली के जीवन, उनके साहित्यिक योगदान और 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' पाठ का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह पाठ मानवीय संवेदना, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी के बारे में बात करता है।
कुदरत ने यह धरती उन तमाम जीवधारियों के लिए अता फरमाई थी जिन्हें खुद उसी ने जन्म दिया था। लेकिन हुआ यह कि आदमी नाम के कुदरत के सबसे अज़ीम करिश्मे ने धीरे-धीरे पूरी धरती को ही अपनी जागीर बना लिया और अन्य तमाम जीवधारियों को दरबदर कर दिया। नतीजा यह हुआ कि अन्य जीवधारियों की या तो नस्लें खत्म हो गईं या उन्हें अपना ठौर-ठिकाना छोड़कर कहीं और जाना पड़ा या फिर आज भी वे एक आशियाने की तलाश में मारे-मारे फिर रहे हैं।
इतना भर हुआ होता तब भी गनीमत होती, लेकिन आदमी नाम के इस जीव की सब कुछ समेट लेने की भूख यहीं पूरी नहीं हुई। अब वह अन्य प्राणियों को ही नहीं खुद अपनी जात को भी बेदखल करने से ज़रा भी परहेज़ नहीं करता। आलम यह है कि उसे न तो किसी के सुख-दुःख की चिंता है, न किसी को सहारा या सहयोग देने की मंशा ही। यकीन न आता हो तो इस पाठ को पढ़ जाइए और साथ ही याद कीजिएगा अपने आस-पास के लोगों को। बहुत संभव है इसे पढ़ते हुए ऐसे बहुत लोग याद आएँ जो कभी न कभी किसी न किसी के प्रति वैसा ही बरताव करते रहे हों।
मानवीय संवेदना: इस पाठ में लेखक विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से यह दिखाते हैं कि कैसे इंसान धीरे-धीरे अपनी संवेदनशीलता खोता जा रहा है और दूसरे प्राणियों के प्रति उसकी संवेदना कम होती जा रही है।
प्रकृति का संतुलन: पाठ इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि मनुष्य प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रहा है और इसके क्या परिणाम हो सकते हैं।
आत्मकथात्मक शैली: पाठ में लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं के क्षरण को दर्शाया है।
पाठ में प्रयुक्त शब्दों के पर्याय जानिए:
"हाकिम" का पर्याय है
"अज़ीज़" का पर्याय है
"सिमटना" का पर्याय है
"सैलाब" का पर्याय है
"डेरा" का पर्याय है
वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध वाक्य के अन्य शब्दों से जाना जाता है, उसे कारक कहते हैं। इस भाग में हम कारक चिह्नों की पहचान करेंगे।
1. माँ ने भोजन परोसा।
2. मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ।
3. मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया।
4. दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो।
नीचे दिए गए शब्दों के बहुवचन रूप चुनिए:
1. चींटी
2. घोड़ा
3. आवाज़
4. टुकड़ा
निम्नलिखित वाक्यांश के आशय पर चिंतन कीजिए और अपना विचार व्यक्त कीजिए:
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर अपने विचार व्यक्त कीजिए:
निदा फ़ाजली (1938-2016) उर्दू की साठोत्तरी पीढ़ी के महत्वपूर्ण कवि थे। उन्हें 1998 में 'खोया हुआ सा कुछ' काव्य संग्रह के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनकी आत्मकथा के दो भाग 'दीवारों के बीच' और 'दीवारों के पार' नाम से प्रकाशित हुए हैं।
निदा फ़ाजली न केवल कवि थे, बल्कि उन्होंने फिल्म उद्योग में गीतकार के रूप में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके लिखे गीत 'आप जैसा कोई', 'होशवालों को खबर क्या', 'तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है' आज भी लोकप्रिय हैं।